वह वक्त और था, जब इन आँखों ने देखे थे, सुन्दर…
Brajesh Kumar Karn
11:18 pm
क्यों बैठी हो खामोश प्रिय, इस सूने गलियारे…
Brajesh Kumar Karn
5:15 pm
सूरज की तपिश सहकर भी, तरूवर छाया हमें दे ज…
Brajesh Kumar Karn
4:01 pm
निकल गया था घर से खुद मैं, मुझे पता नहीं, कहाँ जाना है। सोंच रहा था मिले सकून तब, अपने साथ उसे, घर लाना है। पर सकून कह…
Brajesh Kumar Karn
2:40 pm
हे अम्बर! तेरे ही आँगन में, सब मेघ इकट्ठे हो गए हैं। उनमें से कुछ वही पुराने हैं, और नए कुछ जुड़ गए हैं। सदा गरजते गग…
Brajesh Kumar Karn
1:51 pm
आँखों में बसा है अक्स तेरा, हर वक्त, हमारे दिल में तू है। तुम्हें ढूँढा जहाँ, वहाँ न पाया, मिलता नहीं महफिल में तू है।…
Brajesh Kumar Karn
12:27 pm
सात रंग के रंगों में, रंग जाए यह त्योहार। इसी तर…
Brajesh Kumar Karn
3:20 pm
हमसे सीमा की बात न पूछो, हम तो सीमा पर ही रहते हैं। आँधी,…
Brajesh Kumar Karn
3:06 pm
हम नारी हैं और हम सबकी, एक सी ही सारी कहानी है। कोई न अपना घर है हमारा, अपनी सब व्यथा पुरानी है। जिस माँ ने हमें जन्म…
Brajesh Kumar Karn
4:36 pm
अँधियारों के बीच कहीं एक, पतली सी किरण लहराई है। जाग उठा है सोया हुआ मन, और यौव…
Brajesh Kumar Karn
4:16 pm
सभी अकेले आते हैं जग में, साथ में कोई नहीं आता है। जिसके मुँह चाँदी का चम्मच, उसस…
Brajesh Kumar Karn
1:05 pm
मुझे छाँव में रखकर पापा, खुद धूप में रहते हैं। मेरी खुशी के खातिर, इतना भी क्यों सहते हैं? यदि समय का पहिया रुक जाए, …
Brajesh Kumar Karn
12:38 pm
मैं कौन सा गीत सुनाऊँ जो, तेरा मन पुलकित …
Brajesh Kumar Karn
12:53 pm
छोड़ के आए हम अब यहाँ, अपनी धरती और गाँव को। छोड़ा अपने संगी सखा को, और छोड़ा तरूवर छाँव को। छोड़ आए हम उन गलियों को, ज…
Brajesh Kumar Karn
12:21 pm